प्रयागराज महाकुंभ: संतमत-विरक्त मण्डली के शिविर में उमड़ा आस्था का सैलाब, महर्षि मेँहीँ के संदेशों से महक रही त्रिवेणी नगरी
प्रयागराज महाकुंभ: संतमत-विरक्त मण्डली के शिविर में उमड़ा आस्था का सैलाब, महर्षि मेँहीँ के संदेशों से महक रही त्रिवेणी नगरी
प्रयागराज। जय गुरु महाराज! 🙏🙏🙏
मोक्षदायिनी गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम पर आयोजित 'महाकुंभ 2026' अपनी दिव्यता के चरम पर है। इसी कड़ी में, नागवासुकी अलोप शंकरी चौराहा, सेक्टर-6 स्थित 'संतमत-विरक्त मण्डली' का शिविर आध्यात्मिक ऊर्जा का मुख्य केंद्र बना हुआ है। महर्षि मेँहीँ स्मृति धाम, संताशाही नगर, सिमरडा, गोड्डा (झारखंड) के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का नेतृत्व महामण्डलेश्वर स्वामी विश्वंभरानंद जी महाराज कर रहे हैं।
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| महर्षि मेँहीँ के संदेशों से महक रही त्रिवेणी नगरी |
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| महर्षि मेँहीँ के संदेशों से महक रही त्रिवेणी नगरी |
आध्यात्मिक अनुशासन और साधु सेवा
तस्वीरों में स्पष्ट देखा जा सकता है कि शिविर के मुख्य द्वार पर सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज और उनके अनन्य शिष्य महर्षि संतसेवी जी महाराज की भव्य प्रतिमाएं श्रद्धालुओं का स्वागत कर रही हैं। शिविर के भीतर का वातावरण पूरी तरह सात्विक और भक्तिमय है। यहाँ न केवल सत्संग की अमृत वर्षा हो रही है, बल्कि 'साधु सेवा' की अटूट परंपरा का भी निर्वहन किया जा रहा है। तस्वीरों में स्वामी जी स्वयं साधुओं को प्रसाद और भोजन वितरित करते हुए 'नर सेवा ही नारायण सेवा' के संकल्प को चरितार्थ कर रहे हैं।
महर्षि मेँहीँ का दर्शन: राष्ट्र निर्माण का आधार
इस आध्यात्मिक आयोजन का मुख्य उद्देश्य महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज के उन वचनों को जन-जन तक पहुँचाना है, जो व्यक्ति से लेकर राष्ट्र तक के सुधार की बात करते हैं।
सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज अक्सर कहा करते थे कि "जब तक किसी देश का आध्यात्मिक स्तर उत्तम और ऊँचा नहीं होगा, तब तक उस देश में सदाचारिता ऊँची और उत्तम नहीं होगी।" उनका मानना था कि समाज की हर व्यवस्था की नींव 'आध्यात्मिकता' पर टिकी है। यदि व्यक्ति भीतर से शुद्ध नहीं है, तो बाहरी नीतियां कभी सफल नहीं हो सकतीं।
सदाचार और राजनीति का गहरा संबंध
शिविर में चर्चा के दौरान महर्षि जी के सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि:
"जब तक सदाचारिता ऐसी नहीं रहेगी, तब तक सामाजिक नीति अच्छी नहीं होगी। जब तक सामाजिक नीति अच्छी नहीं होगी, तब तक राजनीति अच्छी और शान्तिदायक नहीं होगी। बुरी सामाजिक नीति के कारण राजनीति शासन सँभाल के योग्य हो नहीं सकेगी और उस देश में अशान्ति फैली रहेगी।"
आज के दौर में जहाँ भौतिकतावाद हावी है, वहां संतमत का यह संदेश अत्यंत प्रासंगिक हो जाता है। कुंभ के इस पावन अवसर पर सर्वसाधारण व्यक्ति इन कल्याणकारी ज्ञान को अपनाकर अपने जीवन को सुखमय बना रहे हैं।
शिविर की झलकियाँ
शिविर में ध्यान अभ्यास, मानस जप, और मानस ध्यान की विधियों पर भी जोर दिया जा रहा है। श्रद्धालु यहाँ आकर मानसिक शांति का अनुभव कर रहे हैं। तस्वीरों में देखा जा सकता है कि कैसे विभिन्न क्षेत्रों से आए साधु-संत एक पंक्ति में बैठकर प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं, जो सामाजिक समरसता का अद्भुत उदाहरण है।
निष्कर्ष
प्रयागराज की रेती पर बसा यह आध्यात्मिक नगर हमें याद दिलाता है कि बिना आत्म-ज्ञान के जीवन अधूरा है। संतमत-विरक्त मण्डली का यह प्रयास निश्चित रूप से समाज में नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना करेगा। यदि आप भी शांति और आत्मिक संतोष की तलाश में हैं, तो सेक्टर-6 स्थित इस शिविर में पधारकर गुरु महाराज के आशीर्वाद और सत्संग का लाभ अवश्य उठाएं।
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जय गुरु महाराज! 🙏🙏🙏
🌸 प्रयागराज महाकुंभ 2026: आध्यात्मिक निमंत्रण 🌸
"जब तक देश का आध्यात्मिक स्तर ऊँचा नहीं होगा, तब तक राजनीति और समाज में शांति नहीं आ सकती।" - सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज
प्रयागराज कुंभ के पावन अवसर पर संतमत-विरक्त मण्डली (महर्षि मेँहीँ स्मृति धाम, गोड्डा) के शिविर में पधारें।
📍 स्थान: नागवासुकी अलोप शंकरी चौराहा, सेक्टर-6, प्रयागराज।
✨ सानिध्य: महामण्डलेश्वर स्वामी विश्वंभरानंद जी महाराज।
यहाँ आप पाएंगे:
✅ दिव्य सत्संग और ध्यान
✅ महर्षि मेँहीँ के कल्याणकारी उपदेश
✅ साधु सेवा और आध्यात्मिक शांति
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आइए, त्रिवेणी के संगम पर गुरु महाराज के चरणों में अपना शीश नवाएं और जीवन को धन्य बनाएं।
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जय गुरु महाराज!
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